October 2, 2022
Maharajganj: तो क्या शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की पोल खुलने से परेशान BSA ने जारी किया तुगलकी फरमान!

महाराजगंज। जिले में शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है, कहीं मिड डे मील योजना के नाम पर बच्चों के निवालों पर डाका डालने, तो कहीं फर्जी अध्यापकों के मामले तो कहीं कहीं अध्यापक गायब रहने और शिक्षा विभाग की मिलीभगत से वेतन लेते रहने का खेल मीडिया कर्मियों द्वारा समय-समय पर उजागर किया जाता रहा है लेकिन अब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने एक तुगलकी फरमान जारी किया है, जिसमें उन्ही मीडिया कर्मियों को स्कूलों में प्रवेश का आदेश दिया गया है जिनका पहचान पत्र जिला सूचना अधिकारी द्वारा निर्गत है, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश पर पत्रकारों सहित जनप्रतिनिधियों में रोष है।

इस समय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार सिंह द्वारा 3 सितंबर 2022 को जारी एक फरमान चर्चा का विषय बना हुआ है, उसमें साफ-साफ लिखा है कि प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में अध्यापक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यपकों/ अध्यापिकाओं द्वारा अवगत कराया गया है कि कतिपय व्यक्ति एवं स्वयं अन्य समूहों में जाकर स्वयं को पत्रकार अथवा मीडिया कर्मी बताकर विद्यालयों में पहुंचकर कक्षा में बच्चों की फोटो खींचने लगते हैं तथा अभिलेखों से छेड़छाड़ करते हैं तथा विभागीय सूचनाएं मांगने का प्रयास करते हैं साथ ही किचन सेट में अनाधिकृत रूप से प्रवेश करते हैं जिससे किसी भी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

पत्र में बीएसए ने आगे लिखा है कि आप को निर्देशित किया जाता है कि यदि कोई व्यक्ति/स्वयं को पत्रकार/मीडियाकर्मी बताकर विद्यालय में आता है तो सर्वप्रथम उनसे शालीनता पूर्वक जिला सूचना अधिकारी द्वारा निर्गत पहचान पत्र दिखाने को कहें, यदि वे व्यक्ति/ समूह परिचय पत्र दिखाते हैं तो ही उनके द्वारा मांगी गयी सूचना उपलब्ध कराएं, परंतु किसी भी अभिलेख की फोटो न खिचने दें, बिना परिचय पत्र के विद्यालय में आये व्यक्ति/ समूह को विद्यालय से बाहर जाने को कहें और कोई भी अभिलेख न दिखाएं और न ही कोई विभागीय सूचना/जानकारी दें एवं तत्काल संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को सूचित करें।

इस पत्र को बीएसए का तुगलकी फरमान क्यों न कहा जाए? क्योंकि समय-समय पर कई मामले प्रकाश में आए हैं कि मिड डे मील योजना के नाम पर बच्चों के साथ खिलवाड़ किया जाता है, तो कहीं शुद्ध पेयजल नहीं है, कहीं अध्यापक स्कूल खुलने के घंटों बाद पहुंचते हैं, तो कहीं-कहीं अध्यापक गायब रहते है और वेतन लेते रहते है, कहीं तो फर्जी अध्यापक बच्चों को पढ़ाते हैं, इसके साथ ही कभी-कभी यह भी सामने आता है कि विद्यालय में बच्चों से सफाई कराई जाती है, झाड़ू लगवाई जाती है।
इस तरह का फरमान अब सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या इन सब मामलों को छुपाने के लिए BSA ने यह फरमान जारी किया है, इस फरमान के बाद पत्रकारों के साथ ही जनप्रतिनिधियों में भी रोष है।

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