November 27, 2022
गन्ना उत्पादन दक्षिण में घटा, उत्तर में बढ़ा

देश में गन्ने का उत्पादन अब दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ रहा है। उत्तर भारत के गन्ना उत्पादन वाले 6 राज्यों के उत्पादन मूल्य में 2011-2020 के बीच 42 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। वहीं दक्षिण भारत के 5 गन्ना उत्पादक राज्यों में इस अवधि के दौरान उत्पादन मूल्य में 32.4 प्रतिशत गिरावट आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के हाल के आंकड़ों से यह जानकारी मिलती है।
इस रिपोर्ट में कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन के मूल्य के आंकड़े होते हैं। इससे पता चलता है कि बिहार, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में गन्ने का उत्पादन एक दशक में 30,216 करोड़ रुपये से बढ़कर 42,920 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

वहीं इस दौरान गन्ने का उत्पादन करने वाले दक्षिण भारत के 5 राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में उत्पादन 26,823 करोड़ रुपये से घटकर 18,119 करोड़ रुपये का रह गया है। इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट आफ डेवलपमेंट रिसर्च (आईजीआईडीआर) के डायरेक्टर महेंद्र देव ने कहा गन्ने का उत्पादन उत्तर की ओर बढ़ने की प्रमुख वजह उत्तर भारत में बड़े पैमाने पर सिंचित भूमि और केंद्र सरकार के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के ऊपर राज्यों द्वारा, खासकर उत्तर प्रदेश में राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) दिया जाना है। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले साल गन्ने का एसएपी बढ़ाकर 340 रुपये क्विंटल कर दिया था जबकि तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों को सिर्फ 280 से 310 रुपये प्रति क्विंटल कीमत मिली थी। हालांकि महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है, उत्तर प्रदेश मूल्य के हिसाब से देश में सबसे ज्यादा गन्ना उत्पादन करने वाला राज्य है।

दक्षिण भारत के 5 उत्पादक राज्यों में कुल गन्ना उत्पादन 2011-2020 की अवधि के दौरान 1,813.5 लाख टन से गिरकर 1,306.5 लाख टन रह गया है। वहीं उत्तर भारत के 6 उत्पादक राज्यों में उत्पादन 1,617 लाख टन से बढ़कर 2,225.1 लाख टन हो गया है

देव ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश जैसे उत्तर भारत के राज्य लगातार एक दशक से गन्ने के लिए ज्यादा एसएपी की पेशकश कर रहे हैं। कर्नाटक और तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्य एसएपी से दूर हैं और उन्होंने राजस्व साझा करने का मॉडल अपनाया है। लेकिन वे राज्य लाभकारी मूल्य नहीं दे पा रहे हैं, क्योंकि मिलें खराब वित्तीय हालत दिखा रही हैं। ऐसे में दक्षिण के राज्य ज्यादा दाम मिलने वाली फसलों को अपना रहे हैं।’

उत्तर भारत के 6 राज्यों में अकेले उत्तर प्रदेश के गन्ने के मूल्य की कुल उत्पादन में हिस्सेदारी 83 प्रतिशत है और इसका उत्पादन मूल्य एक दशक में 24,860 करोड़ रुपये से 43.9 प्रतिशत बढ़कर 35,770 करोड़ रुपये हो गया है। देव ने कहा कि राज्य में लगातार गन्ना उत्पादन बढ़ रहा है। बिहार, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में भी उत्पादन मूल्य में क्रमशः 35, 30, 23 और 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तमिलनाडु में उत्पादन में सबसे ज्यादा करीब 66 प्रतिशत गिरावट आई है और इसका उत्पादन मूल्य 1,855 करोड़ रुपये रह गया है, वहीं आंध्र प्रदेश का उत्पादन मूल्य 730 करोड़ रुपये है, जिसका उत्पादन करीब 63 प्रतिशत घटा है। कर्नाटक को अगर छोड़ दें, जहां पिछले एक दशक में उत्पादन के मूल्य में 0.9 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई है, तो अन्य दक्षिण भारतीय गन्ना उत्पादक राज्यों जैसे तेलंगाना और महाराष्ट्र में उत्पादन मूल्य में क्रमशः करीब 50 प्रतिशत और 27 प्रतिशत की गिरावट आई है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण भारत के 5 उत्पादक राज्यों में कुल गन्ना उत्पादन 2011-2020 की अवधि के दौरान 1,813.5 लाख टन से गिरकर 1,306.5 लाख टन रह गया है। वहीं उत्तर भारत के 6 उत्पादक राज्यों में उत्पादन 1,617 लाख टन से बढ़कर 2,225.1 लाख टन हो गया है।

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