November 27, 2022
सिसवा विकास खण्ड में गजब का फर्जीवाड़ा, कहीं घोटाला तो नही है?

सिसवा बाजार-महाराजगंज। सिसवा विकास खंड में सरकारी धन से विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है, विकास के नाम पर लूट मची हुई है, ऐसे में ग्राम सितलापुर में सीडीओ के निरीक्षण के बाद आरसीसी निर्माण में थर्ड क्वालिटी के ईंट व अन्य सामग्री लगती मिली देख कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए सीडीओ ने भुगतान रोकने का निर्देश दिया, जिसके बाद डीपीआरओ ने फर्म के भुगतान पर रोक लगा दिया है।

अब सवाल यह है कि जिले से आला अधिकारी गांव तक पहुंच कर भ्रष्टाचार को रोक रहे हैं लेकिन यही खंड विकास अधिकारी को अपने आफिस से बाहर निकलने की फुर्सत नहीं है जिससे गांव में खुलेआम लूट मची हुई है, जब यह हाल एक गांव को है तो बाकी अन्य गांव का क्या होगा, सवाल तो यहां यह है कि आखिर खण्ड विकास अधिकारी को किस लिए नियुक्त किया गया है, सिर्फ ऑफिस में बैठने के लिए या फिर गांव में विकास के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए, जांच तो इनकी भी होनी चाहिए कि इनके होते आखिर यह भ्रष्टाचार का खेल कैसे चल रहा है।

बताते चलें ग्राम सभाओं में सरकार विकास के लिए तमाम योजनाओं से पैसा भेज रही है लेकिन विकास के नाम पर खुलेआम भ्रष्टााचार का खेल चल रहा है, ऐसे में सरकार ने सिसवा विकास खण्ड में भी कई ग्राम सभाओं में परफारमेंस ग्रांट करोड़ों रुपए भेजा है जिससे गांव का विकास कार्य होने हैं, ग्राम सीतापुर में भी परफारमेंस ग्रांड से करोड़ों रूपया आया हुआ है लेकिन अब उसे निपटाने की कवायद शुरू हो गई है, जिसमें आरसीसी सड़कों के निर्माण में जम के भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है, ऐसे में जब सीडीओ गौरव सिंह सोगरवाल, डीपीआरओ यावर अब्बास, शासन के नामित जेई सुलेख कुमार के साथ लेकर सीतलापुर गांव में कार्य देखने पहुंचे तो घटिया निर्माण को देखकर दंग रह गए, यहां तपेशवरी बाबा के खेत से चेतराम के खेत तक चेतराम के खेत से झून्नू बाबा के खेत तक 24 लाख 22 हजार रुपए की लागत से आरसीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा था, जिसमें थर्ड क्वालिटी के ईंटों के साथ ही अन्य सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है जो घटिया प्रकार के थे, मानक खराब होने पर इनका भुगतान रोकने का निर्देश दिया।
इसी गांव में 6 लाख 9 हजार रूपये की लागत से साधु की झोपड़ी से व्यास मुनि पांडे के खेत तक सीसी रोड का निर्माण हो रहा था इसमें भी गुणवत्ता व मानक की धज्जियां उड़ायी गयी, यह कार्य भी मानक व गुडवत्ता में नहीं मिला, इस पर सीडीओ ने भुगतान रोकने का निर्देश डीपीआरओ को दिया।

सिसवा विकास खण्ड में इस तरह खुलेआम विकास के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है और यहां तैनात खण्ड विकास अधिकारी को नही पता होगा सोचने वाली बात है, क्यों कि इनको ही भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेदारी दी गयी है, कि विकास कार्यों की मौके पर पहुंच कर जांच करे।
यहां भुगतान रोकना ही उचित नही होगा बल्कि इस भ्रष्टाचार में शामिल सभी अधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए तभी भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।

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