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सिसवा नगर पालिका बनने के बाद 12 हजार परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट, 20 हजार लोग हुए बेरोजगार

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सिसवा नगर पालिका बनने के बाद 12 हजार परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट, 20 हजार लोग हुए बेरोजगार

सिसवा बाजार-महराजगंज। सिसवा बाजार को नगर पालिका परिषद का दर्जा दिला कर लोग विकास की भले ही बातें करें लेकिन जो चौकाने वाला मामला सामने आया है उसके अनुसार विकास तो नही हुआ इतना जरूर हुआ कि लगभग 12 हजार परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया क्यों कि 20 हजार लोग बेरोजगार हो गये और अब हर साल करोड़ों रूपये का नुकसान भी हो रहा है, अब इस हम क्या कहें?
         बताते चले सिसवा को सन् 1874 में अंग्रेजो ने टाउन एरिया का दर्जा दिया था, फिर हमारा देश आजाद हुआ, आजादी के बाद तमाम गांव शहर बनने लगे, कोई तहसील बना तो कोई जिला लेकिन सिसवा वही का वही रहा, यहां लोग विकास के नाम पर विधायक व सांसद बनते रहे लेकिन हर बार धोखा ही मिला और सिसवा विकास की राह देखने के लिए तरसता रहा, व्यापार जो पहले था उजड़ने लगा ऐसे में सिसवा को तहसील बनाने की मांग उठी जिससे कि सिसवा में हजारों की संख्या में लोग पहुंचेंगे और व्यापार बढ़ेगा, तहसील तो नही बना लेकिन सिसवा में आसपास के 16 ग्राम पंचायतों को जोड़ कर सबसे बड़ा नगर पालिका जरूर बना दिया गया, इस तरह नगर पालिका क्षेत्र में सड़कों, नालियों सहित वह सभी विकास कार्य तो होंगे ही जो नगर पालिका के अर्न्तगत आता है, लेकिन व्यापारियों के लिए कोई फायदा नही मिला, इतना जरूर हुआ कि नगर पालिका परिषद बनने के बाद लगभग 20 हजार लोग बेरोजगार ही नही हुए बल्कि हर साल करोड़ों रूपये का नुकसार भी हो रहा है।
      नगर पालिका परिषद में जो 16 ग्राम पंचायतों को जोड़ा गया है मनरेगा वेवसाइट के अनुसार इन ग्राम पंचायतों में कुल 12001 परिवारों में 20003 मनरेगा मजदूर थे, जिसमें 13418 पुरूष व 6585 महिल मनरेगा मजदूर है, इनके पास हर साल मजदूरी के रूप में करोड़ों रूपये आता था लेकिन नगर पालिक परिषद बनने के बाद शामिल इन 16 ग्राम पंचायतों में मनरेगा मजदूरी खत्म हो गयी क्यों कि यह अब ग्राम पंचायत नही रहा बल्कि नगर पालिका परिषद में आ चुका है।
        इस तरह नगर पालिका परिषद बना कर हम भले ही विकास की बात करें लेकिन यहां विकास के नाम पर 12 हजार परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया क्यों कि 20 हजार लोग बेरोजगार हो गये और अब हर साल करोड़ों रूपये का नुकसान भी हो रहा है, क्या हम इसे विकास कहें? विकास के लिए तहसील बनना जरूरी है।