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शहर में डेंगू से बिगड़े हालात : ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति भयावह, सरकारी सिस्टम से भरोसा उठा

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शहर में डेंगू से बिगड़े हालात : ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति भयावह, सरकारी सिस्टम से भरोसा उठा
        कानपुर ।  शहर में डेंगू और बुखार ने पूरी तरह से अपने पैर पसार लिए हैं।  निमोनिया,टायफॉइड,मलेरिया,वायरल और दिमागी बुखार से लोग परेशान हो रहे है।
           बुखार और डेंगू के चलते मरीजों का आंकड़ा रोजाना बढ़ रहा है। कानपुर आउटर में आने वाले थाना बिधनू में पांच पुलिस कर्मियों के एक साथ डेंगू पॉजिटिव आने की पुष्टि के बाद पुलिस विभाग स्वस्थय विभाग में भी हड़कंप मच गया है। थाने के अन्य पुलिस कर्मियों का मेडिकल कराया जा रहा है।
कानपुर में डेंगू का बढ़ता प्रकोप
              शहर में डेंगू का प्रकोप दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। शहर और आउटर के मरीजों को मिलाकर यह आकड़ा 120 के पार चला गया है। जानकारों की माने तो शहर में एक साथ इतने कम समय में 120 से ज्यादा लोगों में डेंगू की पुष्टी गंभीर बताई जा रही है। कानपुर आउटर थाना क्षेत्र में आने वाले बिधनू थाने के पांच पुलिसकर्मी डेंगू की चपेट में आ गए हैं डेंगू की पुष्टि होने के बाद यह पांचो पुलिसकर्मी छुट्टी पर चले गए हैं,जबकि थाने पर अन्य काम करने वाले पुलिसकर्मियों को व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए यह कह दिया गया है कि वह अपने स्वास्थ्य का परीक्षण करवा ले। क्योंकि थाने के कुछ पुलिसकर्मियों को डेंगू और वायरल फीवर के लक्षण मिले है। बिधनू थाना के एसएसआई परमहंस प्रसाद बताया जितने भी कर्मी पॉजिटिव पाए गए है उनको छुट्टी देकर इलाज करवाने की सलाह दी गई है, साथ ही हम लोगों ने थाने पुलिसकर्मियों को चेकअप हल्का बुखार आने पर डेंगू की जांच कराने के निर्देश दिए गए है। जिन्हें हल्का भी बुखार आता है उन्हें छुट्टी पर जाने के लिए ऑर्डर देने विधनू थाने में तैनात महिला सिपाही रंजना, दीपा,सिपाही दीपेंद्र,नरेंद्र सिंह,अजय कुमार को पिछले एक हफ्ते से बुखार की शिकायत हुई थी। जब इन सभी की हालत बिगडऩे लगी तो यह सभी लोग छुट्टी पर चले गए। इसके अलावा थाने में सिपाही सचिन कुमार, नीलेश, सुमित सिंह को बुखार की शिकायत हुई जो डॉक्टर से अपना इलाज करवा रहे हैं। 
              वहीं शहर के ग्रामीण क्षेत्रों सरसौल,ब्लॉक के बुखार प्रभावित गांव करबिगवां और बिल्हौर ब्लाक के डेंगू प्रभावित अनुपूरवा गांव में हालात बदतर हैं। करबिगवां में अर्से से कोई जिम्मेदार झांकने नहीं पहुंचा है,यहां की स्थिति से ग्रामीण भी त्रस्त हो चुके हैं। उनका तो सरकारी सिस्टम से भरोसा उठ गया है।