Gorakhpur। स्थानीय महानगर स्थित सेण्ट ऐण्ड्रयूज कॉलेज में आज बृहस्पतिवार को समाजशास्त्र विभाग द्वारा समाजशास्त्रीय परिषद के तत्वावधान में ‘सरकारी और गैर-सरकारी सेवाओं में समाजशास्त्र की बढ़ती उपयोगिता एवं प्रासंगिकता‘ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विद्यार्थियों द्वारा कॉलेज कुलगीत एवं स्वागत गीत के साथ भव्य शुभारम्भ किया।
इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि कॉलेज के प्राचार्य एवं सचिव प्रोफेसर एस0डी0 राजकुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि समाजशास्त्र की बढती हुई लोकप्रियता विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्रों में अहम भूमिका है। बाल अधिकार, महिला अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और गरीबी उन्मूलन जैसें क्षेत्रों मे समाजशास्त्र विषय बहुत ही उपयोगी है।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ0 कुलदीप कुमार द्विवेदी (असिटेंट प्रोफेसर डी0ए0वी0 पी0जी0 कॉलेज, गोरखपुर) ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज के बदलते सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक परिवेश में समाजशास्त्र विषय की उपयोगिता निरंतर बढती जा रही है। यह विषय न केवल समाज की संरचना, व्यवहार और समस्यओं को समझने में सहायता करता है बल्कि सरकारी एवं गैर-सरकारी सेवाओं में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका उभर कर सामने आयी है।
इस अवसर पर शोध-पत्र प्रस्तुति एवं उद्धरण लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें शोध-पत्र लेखन एवं प्रस्तुतिकरण में प्रथम स्थान उम्मे हानियॉ एम0ए0 द्वितीय वर्ष, द्वितीय स्थान प्रिया सिंह एम0ए0 द्वितीय वर्ष तथा तृतीय स्थान चांदनी परवीन बी0ए0 तृतीय वर्ष ने प्राप्त किया तथा उद्धरण लेखन में प्रथम स्थान ऋषभ सिंह बी0ए0 द्वितीय वर्ष, द्वितीय स्थान सत्यजीत सिंह एम0ए0 द्वितीय वर्ष तथा तृतीय स्थान प्रिया सिंह एम0ए0 द्वितीय वर्ष तथा सांत्वना पुरस्कार प्राची बी0ए0 द्वितीय वर्ष ने प्राप्त किया।

इसी क्रम में विभागध्यक्ष डॉ0 नीतू श्रीवास्तव नेे सभी के प्रति आभार ज्ञापन किया और कहा कि समाजशास्त्र विषय आज के समय में न केवल एक शैक्षिणक विषय है बल्कि एक व्याहारिक एवं अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है इस विषय के द्वारा सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में नौकरी की सम्भावना बढ जाती हैं। इस कार्यशाला का संचालन डॉ0 बी0बी0 लाल तथा डॉ0 ज्योति रावत ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर ज्योति, चांदनी, प्रिया, नीलू, सत्यजीत, दीपक मणि, पंकल, धीरज, विभेष सहित अनेक विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।





