January 2, 2026
दुरुद ओ सलाम पढ़ना अल्लाह की बारगाह में मकबूल इबादतः हाफिज रहमत अली

गोरखपुर। मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में रविवार को इस्लामी बहनों की विशेष कार्यशाला हुई। कार्यशाला के 11वें सप्ताह में दुरुद ओ सलाम की फजीलत व अल्लाह के नेक बंदों के बारे में बताया गया। दरूद बॉक्स बनाने वाली सना परवीन, महविश खान, रवीश खान, अर्शतुल्ला खातून, इकरा मेराज, अतुफा मेराज, रिदा फातिमा, वारिसा अलीम, अफसाना परवीन, नफीसा, आयशा, फरीदा, नाजमीन फातिमा व जारा खान को पुरस्कृत किया गया।

दुरुद ओ सलाम पढ़ना अल्लाह की बारगाह में मकबूल इबादतः हाफिज रहमत अली

मुख्य वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि इस्लाम में दुरुद ओ सलाम पढ़ना अल्लाह की बारगाह में एक निहायत ही मकबूल इबादत है। जब हम पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दुरूद ओ सलाम भेजते हैं, तो अल्लाह हम पर अपनी रहमतें नाजिल फरमाता है। दुरूद ओ सलाम अल्लाह के रसूल (पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से मोहब्बत और उनके हक को अदा करने का जरिया है, जो गुनाहों की माफी, दुआओं की कुबूलियत, अल्लाह की रहमतों में वृद्धि, मुश्किलों को दूर करने और कयामत के दिन सिफारिश दिलाने में मदद करता है, जिससे दुनिया और आखिरत दोनों में बरकत और दर्जा बुलंद होता है। दुरुद ओ सलाम अल्लाह के रसूल से प्रेम बढ़ाता है। दुरूद ओ सलाम पढ़ने से गुनाहों की माफी मिलती है। दुरूद ओ सलाम दुआ और कुबूलियत के बीच एक पुल का काम करता है, इससे दुआएं जल्दी कबूल होती हैं, खासकर दुआ से पहले और बाद में पढ़ने पर। हदीस के अनुसार, जब हम पैगंबर-ए-इस्लाम पर दुरूद ओ सलाम भेजते हैं, तो अल्लाह हम पर दस गुना रहमतें भेजता है। अल्लाह खुद और उसके फरिश्ते भी पैगंबर पर दुरूद ओ सलाम भेजते हैं। दुरूद ओ सलाम पढ़ने से इंसान की परेशानियां दूर होती हैं, रोजी में बरकत होती है और दिल को सुकून मिलता है।

दुरुद ओ सलाम पढ़ना अल्लाह की बारगाह में मकबूल इबादतः हाफिज रहमत अली

संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस रजवी ने कहा कि अल्लाह के नेक बंदे जमीन पर विनम्रता से चलते हैं। तौहीद का पालन करते हैं। गुनाह से दूर रहते हैं। सच्चे दिल से तौबा करते हैं। दूसरों के लिए दुआ करते हैं। अल्लाह के हुक्म के मुताबिक जिंदगी गुज़ारते हैं। अल्लाह के नेक बंदे कमजोर और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। अल्लाह के नेक बंदों के सभी काम और इबादत अल्लाह के बनाए नियमों के मुताबिक होती है। अल्लाह के नेक बंदे वो हैं जो अल्लाह से डरते हैं, उसकी मर्जी के मुताबिक जीते हैं और नेक कामों में आगे रहते हैं।

कार्यशाला में ज्या वारसी, आस्मां खातून, शबनम, नूर सबा, शीरीन सिराज, अफसाना, शिफा खातून, फिजा खातून, नौशीन फातिमा, सना फातिमा, असगरी खातून, यासमीन, आयशा, फरहत, नाजिया, तानिया अख्तर, अख्तरून निसा, अलीशा खातून, सादिया नूर, खुशी नूर, मनतशा, रूमी, शीरीन बानो, समीना बानो, शबाना, सिदरा, सानिया, उम्मे ऐमन, शीरीन आसिफ, सना खातून, आरजू अर्जुमंद, गुल अफ्शा, अदीबा, फरहीन, आफरीन सहित तमाम इस्लामी बहनें मौजूद रहीं।

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