May 22, 2024
दीन-ए-इस्लाम का पैगाम सारी इंसानियत के लिए है-उवैस मुस्तफा

गोरखपुर। गाजी रौजा स्थित आइडियल मैरेज हाउस में शनिवार को शानदार जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी हुआ। क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। नात-ए-पाक पेश की गई।

दीन-ए-इस्लाम का पैगाम सारी इंसानियत के लिए है-उवैस मुस्तफा

अध्यक्षता करते हुए बिलग्राम शरीफ के सज्जादानशीन पीरे तरीकत अल्लामा सैयद उवैस मुस्तफा वास्ती कादरी ने कहा कि पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पूरी कायनात के लिए रहमत हैं और मुसलमानों पर तो बहुत मेहरबान हैं। पैग़ंबरे इस्लाम की मोहब्बत असल ईमान है। जब तक पैग़ंबरे इस्लाम की मोहब्बत मां-बाप, औलाद और सारी दुनिया से ज्यादा न हो आदमी कामिल मुसलमान नहीं हो सकता। दीन-ए-इस्लाम का पैग़ाम सारी इंसानियत के लिए है।

दीन-ए-इस्लाम का पैगाम सारी इंसानियत के लिए है-उवैस मुस्तफा

मुख्य वक्ता अल जामियतुल अशरफिया मुबारकपुर के मुफ्ती सदरुलवरा ने कहा कि पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ताज़ीम और तौकीर अब भी उसी तरह फर्जे ऐन है जिस तरह उस वक्त थी कि जब पैग़ंबरे इस्लाम हमारी जाहिरी आंखों के सामने थे। हमें चाहिए कि हम पैग़ंबरे की पैरवी करें। दीन-ए-इस्लाम कहता है कि हमें एक अल्लाह की इबादत करनी चाहिए जो हम सबका मालिक है। दीन-ए-इस्लाम कहता है कि ऐ मुसलमानों जब नमाज पढ़ो तो एक दूसरे से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहो क्योंकि तुम सब आपस में बराबर हो तुम में से कोई छोटा या बड़ा नहीं है, लेकिन जो परहेजगार व इबादतगुजार है उसका रुतबा बुलंद है।

विशिष्ट वक्ता हाफिज अयाज अहमद ने कहा कि कुरआन-ए-पाक दुनिया के हर इंसान के लिए हर समाज के लिए सही रास्ते पर चलने का और एक बेहतरीन ज़िंदगी जीने का रास्ता है। हर इंसान को कुरआन पढ़ना चाहिए और उसे समझना चाहिए। हर दुआ उस वक़्त तक पर्दा-ए -हिजाब (छुपी) में रहती है जब तक पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और आपके अहले बैत पर दरूद ना भेजा जाए।। जो शख्स दरूदो सलाम को ही अपना वजीफ़ा बना लेता है अल्लाह उसके दुनिया और आखिरत के काम अपने ज़िम्मे ले लेता है। दरूदो सलाम मजलिसों की ज़ीनत है। दरूद शरीफ़ तंगदस्ती को दूर करता है। दरूदो सलाम से पैग़ंबरे इस्लाम की मोहब्बत का जज़्बा और बढ़ता है। दरूदो सलाम पढ़ने वाले को किसी की मुहताजी नहीं होती।

अंत में सलातो सलाम मुल्क में अमनो सलामती की दुआ मांगी गई। मरहूम हाजी मोहम्मद अब्दुल कुद्दुस की रूह को इसाले सवाब भी किया गया। जलसे में हाजी उबैद अहमद खान, अब्दुल मतीन फैजी, नासिफ अहमद, शादाब अहमद, मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी, कारी फुरकान अहमद, मौलाना मकसूद आलम, कारी नसीमुल्लाह, मो. आजम, हाफिज रहमत अली, आदिल अमीन, सैयद इरशाद अहमद आदि मौजूद रहे।

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