September 4, 2026
पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र की आवाज पर हमला है- सेराज अहमद कुरैशी

नई दिल्ली। दो महिला पत्रकारों शाहीन खान 4 पीएम न्यूज नेटवर्क और नफीसा खान स्वतंत्र पत्रकार के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित रूप से की गई निर्मम मारपीट की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, चिंताजनक और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करने वाली है। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती है और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग करती है।

इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक सेराज अहमद कुरैशी ने घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकार समाज का आईना होता है। पत्रकार सत्ता से सवाल पूछता है, जनता की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाता है और समाज में घट रही घटनाओं को सामने लाने का काम करता है। पत्रकार को डराना, धमकाना या उसके साथ मारपीट करना केवल एक व्यक्ति के अधिकारों का हनन नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। पत्रकार अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए यदि किसी व्यवस्था, अधिकारी या संस्था से सवाल करता है तो उसका जवाब कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर दिया जाना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं।

पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र की आवाज पर हमला है- सेराज अहमद कुरैशी

महिला पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार और भी गंभीर मामला
सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि दो महिला पत्रकार शाहीन खान 4 पीएम न्यूज नेटवर्क और नफीसा खान स्वतंत्र पत्रकार हैं। किसी भी महिला के साथ दुर्व्यवहार, अभद्रता अथवा मारपीट की शिकायत को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी केवल समाज की नहीं, बल्कि कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की भी है। उन्होंने कहा, “अगर लोकतंत्र की आवाज उठाने वाली महिला पत्रकार ही अपने कर्तव्य के दौरान सुरक्षित नहीं रहेंगी, तो आम महिला की सुरक्षा का विश्वास कैसे कायम होगा?” महिला पत्रकारों को उनके पेशे के कारण निशाना बनाना अथवा उनके साथ हिंसक व्यवहार करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

पत्रकार सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित न रहे
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि देशभर में पत्रकारों पर हमले, धमकियां, मुकदमे, दबाव और उत्पीड़न की घटनाएं पत्रकारिता के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। पत्रकार सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था केवल कागजों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीन पर उसका स्पष्ट प्रभाव दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकार जब खबर के लिए सड़क पर निकलता है तो वह अपने लिए नहीं, समाज के लिए निकलता है। वह भ्रष्टाचार, अपराध, अन्याय और शोषण को सामने लाता है। ऐसे में पत्रकार को सुरक्षा देने के बजाय यदि उसके साथ ही हिंसा की जाती है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अत्यंत गंभीर विषय है।

पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर कोई समझौता नहीं
सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा है। पत्रकार को बिना भय और दबाव के अपना काम करने का अधिकार मिलना चाहिए। सत्ता चाहे किसी की भी हो, पत्रकार का काम सवाल पूछना है और पत्रकारिता का धर्म सच को जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और सवालों के लिए जगह होनी चाहिए। किसी पत्रकार की खबर या सवाल पसंद नहीं आने पर कानून के रास्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन हिंसा, धमकी और पुलिसिया दबाव किसी भी लोकतांत्रिक समाज की पहचान नहीं हो सकते।

मानवाधिकारों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। पत्रकार भी सबसे पहले एक नागरिक है और उसके मानवाधिकारों की रक्षा करना राज्य तथा समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “वर्दी कानून और अधिकार की प्रतीक है, भय और हिंसा की नहीं। पुलिस जनता की रक्षक है और पत्रकार जनता की आवाज। दोनों के बीच टकराव नहीं, बल्कि कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप संवाद होना चाहिए।”

इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन पत्रकारों के साथ खड़ी है
सेराज अहमद कुरैशी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ® देश के किसी भी कोने में पत्रकार के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक एवं कानूनी तरीके से आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने कहा, “शाहीन खान और नफीसा खान अकेली नहीं हैं। देश का पत्रकार समाज उनके साथ खड़ा है। पत्रकार पर हमला होगा तो पत्रकार संगठन आवाज उठाएंगे। पत्रकार को दबाने की कोशिश होगी तो लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध किया जाएगा। पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पत्रकारों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संबंधित प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए तथा पीड़ित महिला पत्रकारों को न्याय और सुरक्षा प्रदान की जाए।

अंत में राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने देश के पत्रकारों से आह्वान किया कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकें नहीं, एक-दूसरे के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट रहें और सच्चाई, संविधान, लोकतंत्र तथा पत्रकारिता की स्वतंत्रता की मशाल को कभी बुझने न दें।
कलम को डराया जा सकता है, लेकिन उसकी स्याही में लिखी सच्चाई को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। पत्रकार की आवाज जनता की आवाज है और जनता की आवाज को दबाने की हर कोशिश के खिलाफ पत्रकार समाज एकजुट होकर खड़ा रहेगा।

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