गोरखपुर। स्थानीय महानगर स्थित सेण्ट ऐण्ड्रयूज कॉलेज में कला संकाय (इको क्लब 2) के तत्वाधान में मंगलवार को “वायु गुणवत्ता प्रबंधन एवं पर्यावरण जागरुकता” विषय पर कार्यशाला केन्द्रिय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के फ्रेम प्लान और स्टेट एक्शन प्लान के तहत पर्यावरण जागरूकता और वायु गुणवता प्रबधन पर केन्द्रित थे।
कार्यक्रम की शुरूआत डॉ0 सुनीत पॉटर द्वारा मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और अन्य गणमान्य अतिथियों के औपचारिक स्वागत एंव अभिनन्दन के साथ हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर आर० एन० सैमुएल ने की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोरखपुर के महापौर डॉ0 मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने सम्बोधन में शहर को स्वच्छ और हरित बनाने के लिये नगर निगम द्वारा उठाये जा रहे कदमों पर विस्तार से उल्लेख्य किया। उन्होनें वायु प्रदूषण के लिये धूप (धुँआ) और धूल (निर्माण और सड़को की धूल) को मुख्य रूप से उत्तरदायी बताया।
कचरा प्रबंधन पर जोर देते हुये उन्होनें कहा कि गीले-सूखे इवेस्ट और बायोकेमिक्ल कचरे के विज्ञानिक निस्तारण के साथ-साथ एनटीपीसी के संयोग से सुखे कचरे को ग्रीन चारकोल में बदले की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होने नागरिकों से अपील की वे कूड़ा सडक पर न फेखकर कूडेदान को प्रयोग करे तथा कचरा जलाने जैसी गतिविधियों से बचे। जल संरक्षण पर विशेष बल देते हुये। उन्होने कहा कि पानी की बरबादी को रोकना बेहद आवश्यक है।
उन्होनें बताया की बारिश का पानी अपने सबसे शुद्ध रूप में होता है जिसे हमें संरक्षित करना चाहिये और इस दिशा में कई प्रयास भी किये जा रहे है। साथ ही आर0ओ0, वाटर प्यूरिफायर से निकलने वाले अपशिष्ट जल को भी अन्य कार्याे में उपयोग करने का सुझाव दिया।
विशिष्ट अतिथि व मुख्य वक्ता प्रोफेसर गोविंद पाण्डेय डायरेक्टर जनरल बुद्धा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने वायु गुणवक्ता प्रबधन पर विस्तृत और विज्ञानिक प्रस्तुति दी उन्होने वायु प्रदूषण के गभीर प्रभाव मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इसके दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला।
अपने अध्यीक्षय उद्धबोधन में प्रोफेसर आर0 एन0 सैमुएल ने प्रकृति द्वारा प्रदत्त शुद्ध हवा और जल को रेखानकित किया। उन्होने इस बात पर बल दिया कि बिमारी होने और डॉक्टर के पास जाने से बेहतर है कि हम ऐसी स्थिति पैदा होने ही न दे और अपनी हवा तथा पर्यावरण को साफ रखे। उन्होने आधुनिक जीवन शैली और पर्यावरणीय बदलाव के बीच सन्तुलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला का एक अत्यन्त सृजानात्मक और अनूठा आकर्षण कला संकाय को विभिन्न विभागों द्वारा वर्ष 2047 से वर्तमान वर्ष 2026 को लिखे गये काल्पनिक पत्रों का संकलन रहा। जिसमें इसमें मनाविज्ञान विभाग और हिन्दी विभाग ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया जब की अंग्रेजी व भूगोल विभाग ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। कार्यशाला के द्वितीय तकनीकी सत्र में विभिन्न विभागो शोधर्थियों एवं विद्यर्थियों ने वायु गुणवक्ता प्रबधन से संबधित अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये।
निर्याणक के रूप में प्रोफेसर सुषमा जॉन, प्रोफेसर रविन्द्र आनन्द व डॉ0 राहुल श्रीवास्तव उपस्थित थे। कार्यक्रम के अन्त में अभार ज्ञापन का कार्य आयोजन सचिव प्रोफेसर सीमा शेखर ने किया। कार्यशाला का संयोजन ले0 प्रोफेसर अमित मसीह ने किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में इको क्लब के सदस्यों डॉ0 नेहा शुक्ला, डॉ0 देवरंजन, डॉ0 श्वेता जॉनसन एवं डॉ0 बी0 बी0 लाल ने का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समापन अवसर सफल प्रतिभागियो एंव विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गये। इस प्रकार कार्यशाला पर्यावरण संरक्षण, वायु गुणवता प्रबधन एवं सतत भविष्य के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुये सम्पन्न हुई।




