सिसवा बाजार-महराजगंज। स्थानीय नगर स्थित सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आज रविवार को टीचर-पेरेंट्स मीटिंग का शुभारंभ विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मनोहारी स्वागत गान से हुआ। छात्राओं की मधुर स्वर-लहरियों, सधे हुए सुर-ताल और आत्मीय अभिव्यक्ति ने कार्यक्रम के वातावरण को गरिमामय एवं भावपूर्ण बना दिया।
छात्राओं ने अपने सुरों के माध्यम से उपस्थित अभिभावकों, शिक्षकों एवं अतिथियों का आत्मीय अभिनंदन किया। उनकी अनुशासित और प्रभावशाली प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया तथा करतल ध्वनि से छात्राओं का उत्साहवर्धन किया गया। स्वागत गान ने जहां कार्यक्रम में सांस्कृतिक माधुर्य घोला, वहीं यह संदेश भी मुखरित किया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि कला, संस्कार, अनुशासन और व्यक्तित्व निर्माण का समन्वित उपक्रम है।
इसी भावभूमि पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के चेयरमैन ओ. ए. जोसेफ ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला केवल विद्यालय में प्रदान की जाने वाली शिक्षा से नहीं, बल्कि परिवार के संस्कार, अभिभावकों के सतत मार्गदर्शन और शिक्षक-परिवार के सुदृढ़ समन्वय से निर्मित होती है।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा को महज पुस्तकीय ज्ञान और परीक्षा में प्राप्त अंकों की परिधि में सीमित नहीं किया जा सकता। वास्तविक शिक्षा वह है, जो बालक के भीतर विवेक, अनुशासन, संवेदनशीलता, आत्मविश्वास और उत्तरदायित्व का बोध जागृत करे। विद्यालय जहां ज्ञान और दिशा का आलोक प्रदान करता है, वहीं उस आलोक को जीवन-व्यवहार में परिणत करने की प्रथम पाठशाला परिवार ही होता है।
विद्यालय की प्रबंधक विन्सी जोसफ ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के समक्ष संभावनाओं के द्वार खोलते हैं, किंतु उन द्वारों से आगे बढ़ने का साहस, अनुशासन और निरंतरता उन्हें पारिवारिक परिवेश से प्राप्त होती है। माता-पिता यदि बच्चों के अध्ययन, आचरण, संस्कार और भावनात्मक आवश्यकताओं के प्रति सजग रहें, तो उनमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने का आत्मबल और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
उन्होंने आधुनिक जीवन की बदलती परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अभिभावकों के लिए यह आवश्यक है कि वे बच्चों के साथ केवल अनुशासक की भूमिका में न रहें, बल्कि उनके विश्वासपात्र और मित्रवत मार्गदर्शक भी बनें। बच्चों की भावनाओं, जिज्ञासाओं और समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनना उनके व्यक्तित्व को स्वस्थ दिशा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालय और परिवार के मध्य निरंतर एवं सार्थक संवाद ही ऐसे नागरिकों का निर्माण कर सकता है, जिनमें ज्ञान के साथ मानवीय संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व भी विद्यमान हो।
इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन ने सभी अभिभावकों का आह्वान किया कि वे विद्यालय की शैक्षिक एवं संस्कारपरक यात्रा के सक्रिय सहभागी बनें और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में विद्यालय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है; उसकी सुदृढ़ संरचना में परिवार, शिक्षक और समाजकृतीनों की सामूहिक सहभागिता अपरिहार्य है।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य बैजू चेरियन, उपप्रधानाचार्य शिवेंद्र, प्रेम सागर चौबे, धनंजय मिश्र, फणींद्र मिश्र, मुन्ना पाण्डेय, ए.बी.सर, भुवनेश्वर मिश्र, अशोक प्रजापति, नरसिंह कुशवाहा, अविरामी मिस, रमैया मिस, राजकुमार सिंह, प्रदीप रौनियार, अवनीश मिश्रा, अनिल पांडे, पीयूष त्रिपाठी, यशी सिंह, अतुल्या मिस, जीथू बीजू, पुंडरीक गुप्ता, संतोष वर्मा, सतीश त्रिपाठी, अजीत बारीक, दीप्ति बारीक, गंगा धर दुबे, सोनू भारती, अमृता पाठक, वर्षा जायसवाल, श्रीराम, मनीष श्रीवास्तव, सोनू सुरेंद्र, शिजा बैजू, स्नेहा मिस, लिप्सी मिस, तमजिद अली, राधेश्याम, प्रहलाद प्रसाद, ऐश्वर्या मिस, भुवाल गुप्ता, मंशा गुप्ता, सोनू सर, मनोरमा जायसवाल, सलोनी अग्रवाल, अनूप रौनियार, नमिता मिश्रा, रंजना त्रिपाठी, संतोष तिवारी, रवीना खातून, अनुष्का मद्धेशिया, ओम प्रकाश वर्मा, वीरेंद्र त्रिपाठी, संजय गुप्ता, सिनसी पीटर, कार्तिका मिस, संजय गुप्ता, ललितेश गुप्ता, संजीव सर, सीजा चेरियन, रमा श्रीवास्तव एवं मुकेश सहित समस्त छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




