May 31, 2026
भारत-नेपाल सीमा पर 155वीं नारायणी गंडकी महाआरती का हुआ आयोजन

वाल्मीकिनगर। भारत नेपाल सीमा पर अवस्थित संगम तट के बेलवा घाट परिसर में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पूर्णिमा तिथि के अवसर पर शनिवार की देर शाम 155वीं नारायणी गंडकी महाआरती कार्यक्रम का आयोजन किया गया।अंतर्राष्ट्रीय न्यास स्वरांजलि सेवा संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्षा अंजू देवी, मैनेजिंग डायरेक्टर संगीत आनंद, आचार्य पंडित अनिरुद्ध द्विवेदी, निर्माता अरविंद अकेला,समाजसेवी भारत कुमार,स्वास्थ्यकर्मी कुमारी संगीता, सीमा सिंह, पुनीता देवी, पूनम देवी, रितिका कुमारी,भजन गायिका मधु देवी, हीरीमति देवी,कामेश्वर श्रीवास्तव एवं राजा कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके किया।

भारत-नेपाल सीमा पर 155वीं नारायणी गंडकी महाआरती का हुआ आयोजन

इस महा आरती में श्रद्धालुओं ने मां नारायणी गंडकी की पूजा अर्चना करके देश समाज और विश्व कल्याण की कामना की। वैदिक मंत्र ,शंख ध्वनि और दीपों की अलौकिक छटा से संगम तट भक्तिमय वातावरण में साराबोर हो गया। गंगा मैया की जय, नारायणी गंडकी माता की जय आदि जयकारों से कार्यक्रम स्थल गुंजायमान होता रहा।श्रद्धालुओं ने गंगा ,गंडक एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया।महाप्रसाद की व्यवस्था संरक्षक विजय कुमार, एवं निर्माता अरविंद अकेला द्वारा की गई।

भारत-नेपाल सीमा पर 155वीं नारायणी गंडकी महाआरती का हुआ आयोजन

आचार्य पंडित अनिरुद्ध द्विवेदी ने कहा कि धार्मिक ग्रंथो में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास)की विशेष महिमा बताई गई है।संगीत आनंद ने कहा कि यह मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और इस अवधि में किए गए जप तप दान एवं पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्षाअंजू देवी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण संवर्धन के प्रति जन जागरूकता फैलाने हेतु इस महा आरती का आयोजन 6 नवंबर 2014 से किया जाता है। इसका शुभारंभ पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक विनय बिहारी, स्वामी उपेंद्र पाराशर और धर्मपाल गुरु वशिष्ठ जी महाराज के नेतृत्व में किया गया था।

समाजसेवी संगीत आनंद ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग खतरे की घंटी बजा रही है । हमें प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। विदित हो कि संस्था द्वारा मानवीय संवेदनाओं के प्रति जन जागरूकता फैलाने हेतु दैनिक चलंत दरिद्र नारायण भोज का आयोजन विभिन्न स्थानों पर किया जाता है। बेंगलुरु में स्वरांजलि सरगम, सुधीर कुमार, वाल्मीकिनगर में संगीत आनंद,औरंगाबाद में अंजू देवी और बगहा में विजय कुमार द्वारा सफलतापूर्वक ऐसी मानवीय पहल की जा रही है। लावारिस दिव्यांगजनों की सेवा ,धार्मिक और सामाजिक ऐसे कार्यक्रमों में उत्कृष्ट योगदान देने वालों में समाजसेवी पशुपतिनाथ गुप्ता, धर्मेंद्र कुमार गुप्ता, लेखक एम. शफी, पवन भट्टराई, कोटि होम आश्रम नेपाल के प्रबंधक मोतीलाल ढकाल, भक्त कृष्णा पांडे, बृजेश्वर,एवं फौजी विद्यासागर राणा के प्रति आभार प्रकट किया गया। संगीत आनंद, मधु देवी, गायक राजा कुमार एवं हीरीमति देवी ने कई पारंपरिक भजनों को प्रस्तुत किया। संचालन भारत कुमार ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन कामेश्वर श्रीवास्तव एवं अरविंद अकेला ने किया।

कार्यक्रम के अंत में थरुहट के लोक कलाकार एवं मुखिया खूबलाल बड़घडिया ,भारतीय थारू कल्याण महासंघ के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष दीप नारायण प्रसाद और समाजसेवी उमाकांत गुप्ता के निधन पर उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया और भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

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