September 11, 2026
महिला पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए देशव्यापी संघर्ष का ऐलान, इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने उप जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

गोरखपुर। दिल्ली में पत्रकार शाहीन खान (4 पीएम न्यूज नेटवर्क) एवं नफीसा खान (स्वतंत्र पत्रकार) के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित रूप से की गई मारपीट की घटना के विरोध में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने जिलाधिकारी गोरखपुर के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति महोदया के नाम सात सूत्रीय मांग-पत्र उप जिलाधिकारी गोरखपुर श्री हिमांशु वर्मा जी को सौंपकर घटना की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई तथा पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग की।

इस अवसर पर इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि पत्रकार पर हमला सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की आवाज, जनता के अधिकार और संविधान में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों के साथ निर्मम मारपीट की घटना बेहद गंभीर है। पत्रकार अपना काम किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि समाज और देश के सामने सच लाने के लिए करता है। पत्रकारों को डराकर, धमकाकर या उनके साथ मारपीट कर कलम और कैमरे की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि “कलम झुकेगी नहीं, कैमरा रुकेगा नहीं और पत्रकारों की आवाज दबेगी नहीं।” इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष करता रहेगा। केंद्र सरकार को पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में गंभीर पहल करनी चाहिए।
राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद इरफ़ानुल्लाह ने कहा कि पत्रकारों को समाचार संकलन के दौरान सुरक्षित वातावरण मिलना उनका अधिकार है। यदि किसी पत्रकार को उसके कार्य के दौरान धमकाया या रोका जाता है तो यह प्रेस की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो जिससे भविष्य में कोई पत्रकारों के सम्मान से खिलवाड़ करने का साहस न करे।

राष्ट्रीय संगठन सचिव अखिलेश्वर धर द्विवेदी ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल ज्ञापन देना नहीं, बल्कि पत्रकारों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हमला करने वालों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी और समयबद्ध जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। पत्रकारों को कवरेज के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है।
ज्ञापन में संगठन ने सात प्रमुख मांगें रखीं। इनमें शाहीन खान एवं नफीसा खान के साथ हुई कथित मारपीट की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई, महिला पत्रकारों की सुरक्षा एवं गरिमा की रक्षा, समाचार कवरेज के दौरान पत्रकारों के लिए स्पष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल, पत्रकारों पर हमला अथवा कवरेज में बाधा डालने की स्थिति में तत्काल प्राथमिकी एवं समयबद्ध जांच, पत्रकारों के विरुद्ध कथित दुर्भावनापूर्ण मुकदमों की उच्चस्तरीय समीक्षा तथा केंद्र सरकार द्वारा प्रभावी पत्रकार सुरक्षा कानून बनाए जाने की मांग प्रमुख रही।

संगठन ने कहा कि यदि पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन देशभर के पत्रकारों को लोकतांत्रिक एवं कानूनी तरीके से एकजुट कर आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाने के लिए बाध्य होगा। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने दोहराया कि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान, स्वाभिमान, अधिकार और स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी, राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद इरफ़ानुल्लाह खान, राष्ट्रीय संगठन सचिव अखिलेश्वर धर द्विवेदी, मंडल अध्यक्ष गोरखपुर रफी अहमद, मंडल सचिव सतीश चंद्र व सतीश मणि त्रिपाठी, जिला प्रवक्ता मोहम्मद आजम, अरूण कुमार, राममिलन, पप्पू कुमार, मनीष कुमार, आशुतोष कुमार, अवधेश कुमार श्रीवास्तव, शादाब अहमद, ललित कुमार सिंह, श्रवण कुमार गुप्ता, मेराज अहमद, रमाशंकर गुप्ता, अंशुल वर्मा, अजमेर खान, जुबेर आलम सहित संगठन के पदाधिकारी एवं पत्रकारगण उपस्थित रहे।

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