October 15, 2026
जंतर-मंतर पर पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार के विरोध में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन विदर्भ ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

यवतमाल-महाराष्ट्र। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार, अपमानजनक भाषा के प्रयोग तथा उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने के आरोपों को लेकर पत्रकार जगत में रोष व्याप्त है। इस घटना के विरोध में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा, स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई है। इसी क्रम में संगठन के विदर्भ प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट जाकिर हुसैन रहीम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी यवतमाल के माध्यम से भारत की महामहिम राष्ट्रपति को मांग पत्र सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में जनता की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करने तथा समाज में व्याप्त अन्याय के विरुद्ध जनमत तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में पत्रकारों के साथ कथित अभद्र व्यवहार, अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल और कानून के विरुद्ध हिरासत में लिए जाने के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के अनुरूप कार्य करने के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार प्रकाशित करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जवाबदेही निभाने वाला एक महत्वपूर्ण दायित्व है। पत्रकार दिन-रात मेहनत करके जनता की समस्याओं, सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति, भ्रष्टाचार, अपराध, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दों को सामने लाते हैं। इसके बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में पत्रकारों को धमकी, दबाव, मारपीट, झूठे मुकदमों की आशंका, सामाजिक उत्पीड़न और उनके कार्य में बाधा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीण और छोटे शहरों में काम करने वाले पत्रकारों की स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। कई पत्रकार सीमित संसाधनों में जनहित से जुड़ी खबरें तैयार करते हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, दुर्घटना बीमा, कानूनी सहायता और अन्य आवश्यक सामाजिक सुरक्षा का अभाव रहता है। स्थानीय स्तर पर समाचार संकलन करते समय उन्हें प्रभावशाली लोगों के दबाव तथा विरोध का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाना समय की मांग है।
एसोसिएशन ने मांग की कि पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा, धमकी और उत्पीड़न की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाए तथा प्रत्येक मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो। पत्रकारों को उनके कार्य के कारण प्रताड़ित किए जाने की शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी तंत्र बनाया जाए, ताकि पीड़ित पत्रकारों को न्याय प्राप्त करने के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े।

इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के विदर्भ प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट जाकिर हुसैन रहीम ने कहा कि पत्रकार समाज और सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उनका दायित्व जनता की समस्याओं को सामने लाना और शासन-प्रशासन को जवाबदेह बनाने में योगदान देना है। यदि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले पत्रकारों को ही अपमान, धमकी अथवा अनुचित कार्रवाई का सामना करना पड़े, तो यह स्वतंत्र पत्रकारिता के वातावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर की घटना से संबंधित आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्यों का पता चल सके और किसी भी निर्दाेष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से नियमों का उल्लंघन अथवा अनुचित आचरण प्रमाणित होता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

एडवोकेट जाकिर हुसैन रहीम ने यह भी कहा कि पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा किसी एक संगठन या व्यक्ति का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन पत्रकारों के साथ होने वाले अन्याय के विरुद्ध लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।

इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन की यवतमाल जिला अध्यक्ष महिल विंग मीनाक्षी मून ने पत्रकारिता के क्षेत्र में महिला पत्रकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों को समाचार संकलन और रिपोर्टिंग के दौरान कई बार असहज परिस्थितियों, अभद्र टिप्पणियों, व्यक्तिगत हमलों, ऑनलाइन उत्पीड़न और असुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सार्वजनिक स्थलों पर रिपोर्टिंग करते समय उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने महिला पत्रकारों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, शिकायत निवारण व्यवस्था, कानूनी सहायता और पेशेवर सम्मान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों की भागीदारी और सुरक्षा के बिना स्वतंत्र तथा समावेशी पत्रकारिता की कल्पना अधूरी है। संगठन महिला पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाता रहेगा।

जिला परिषद सदस्य जावेद शेख ने पत्रकारों की सामाजिक, आर्थिक और पेशेवर समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज की वास्तविक परिस्थितियों को जनता और जिम्मेदार संस्थाओं तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। वे प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं, जनसमस्याओं और अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में उनके कार्य और सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि महामहिम राष्ट्रपति इस गंभीर मामले पर उचित संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपेक्षा करेंगी। संगठन का कहना है कि पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है। किसी भी आरोप की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए तथा दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस अवसर पर एडवोकेट जाकिर हुसैन रहीम (विदर्भ प्रदेश अध्यक्ष), राहुल शेंडे (प्रदेश महासचिव), राजू पटेल (प्रदेश उपाध्यक्ष), नेहा नागभिडकर (प्रदेश अध्यक्ष, महिला विंग), सचिन काकडे (मारेगांव तालुका अध्यक्ष), रितेश मुन (यवतमाल जिला उपाध्यक्ष), मीनाक्षी मून (यवतमाल जिला अध्यक्ष महिला विंग ), शांता चव्हाण (यवतमाल जिला सचिव), जावेद शेख (जिला परिषद सदस्य), रुस्तम शेख, सुलेमान फजलानी, अकरम दिवान, रमेश खरतडे सर सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने दोहराया कि पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगा। संगठन ने सभी संबंधित पक्षों से पत्रकारिता की स्वतंत्रता, कानून के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाने में सहयोग करने की अपील की।

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