

अहमदनगर-महाराष्ट्र। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन, अहमदनगर (अहिल्याबाई नगर) महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण बैठक स्मार्ट अहमदनगर न्यूज चैनल कार्यालय, फकीरवाड़ा, मुकुन्द नगर में सम्पन्न हुई। बैठक के मुख्य अतिथि इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी, विशिष्ट अतिथि मोहम्मद ताबिश, प्रदेश अध्यक्ष मराठवाड़ा तथा मुख्य वक्ता सैय्यद अनवर कादरी, प्रदेश संगठन सचिव मराठवाड़ा थे।
बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, संगठन की मजबूती, पत्रकारों के उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष, आवास, चिकित्सा सुविधा, असुरक्षित पत्रकारों को शस्त्र लाइसेंस, पेंशन योजना के सरलीकरण सहित पत्रकार हितों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के सजग प्रहरी हैं। समाज की समस्याओं, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक कमियों, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और आम जनता की आवाज को सामने लाने का महत्वपूर्ण कार्य पत्रकार करते हैं। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकारों का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून पारित होना निश्चित रूप से पत्रकारों के संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन कानून का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उसकी धाराओं का धरातल पर प्रभावी ढंग से पालन हो। कई स्थानों पर पत्रकारों के साथ घटनाएं होने के बावजूद संबंधित कानून की धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत नहीं किए जाते। कहीं कानून की जानकारी का अभाव है तो कहीं संबंधित अधिकारियों और पत्रकारों में कानून की धाराओं एवं प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है।
श्री कुरैशी ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून की धाराओं की जानकारी प्रत्येक पत्रकार तक पहुंचाना संगठन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। जिला और तहसील स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, पत्रकारों को बताया जाए कि उत्पीड़न, धमकी, मारपीट, दबाव, जबरन रोकने, समाचार प्रकाशन के कारण प्रताड़ित करने अथवा पत्रकारिता के कार्य में बाधा डालने जैसी परिस्थितियों में कानून के अंतर्गत उपलब्ध सुरक्षा एवं कानूनी उपाय क्या हैं।
उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी पत्रकार के साथ अन्याय होने पर चुप नहीं बैठेगा। पत्रकार के साथ होने वाला उत्पीड़न चाहे किसी राजनीतिक व्यक्ति द्वारा हो, अधिकारी द्वारा हो, अपराधी तत्वों द्वारा हो या किसी अन्य प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा—संगठन लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से पत्रकार के साथ खड़ा रहेगा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगठन की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि संगठन केवल पदों और बैठकों से मजबूत नहीं होता, बल्कि सक्रिय सदस्यों, आपसी एकता, अनुशासन, पारदर्शिता और पत्रकार हितों के लिए निरंतर संघर्ष से मजबूत होता है। उन्होंने पत्रकारों से व्यक्तिगत मतभेदों को संगठन से अलग रखते हुए पत्रकार हितों के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया।
उन्होंने पत्रकारों के लिए आवास योजना को महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए कहा कि लंबे समय से पत्रकार समाज के हित में काम कर रहे हैं, लेकिन अनेक पत्रकार आज भी स्वयं के आवास की समस्या से जूझ रहे हैं। सरकार से मांग की जानी चाहिए कि पात्र पत्रकारों के लिए पारदर्शी और सरल आवास योजना लागू की जाए।
उन्होंने पत्रकारों के लिए चिकित्सा सुविधा का विस्तार करने की मांग करते हुए कहा कि पत्रकार और उनके परिवारों को उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष स्वास्थ्य योजनाएं बनाई जानी चाहिए। पत्रकारों के लिए पेंशन योजना को भी सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता है, ताकि वरिष्ठ एवं आर्थिक रूप से कमजोर पत्रकारों को सम्मानजनक जीवन जीने में सहायता मिल सके।
असुरक्षित परिस्थितियों में कार्य करने वाले पत्रकारों के संबंध में उन्होंने कहा कि जिन पत्रकारों को वास्तविक और प्रमाणित सुरक्षा खतरा है, उनके मामलों का निष्पक्ष आकलन करते हुए नियमानुसार शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
विशिष्ट अतिथि एवं प्रदेश अध्यक्ष मराठवाड़ा मोहम्मद ताबिश ने कहा कि पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत संगठनात्मक ढांचा आवश्यक है। यदि पत्रकार अलग-अलग रहेंगे तो उनकी समस्याओं की आवाज कमजोर होगी, लेकिन संगठन के बैनर तले पत्रकार एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग उठाएंगे तो शासन-प्रशासन तक प्रभावी संदेश पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र में संगठन को गांव, तहसील, तालुका और जिला स्तर तक मजबूत किया जाएगा। प्रत्येक पदाधिकारी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और संगठन की गतिविधियों को केवल बैठकों तक सीमित न रखते हुए पत्रकारों की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ना होगा।
उन्होंने पत्रकार सुरक्षा कानून के बारे में जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानून बन जाना पर्याप्त नहीं है; पत्रकारों को यह भी मालूम होना चाहिए कि संकट की स्थिति में उन्हें क्या कदम उठाना है, किस अधिकारी से संपर्क करना है और किस कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई की मांग करनी है।
मोहम्मद ताबिश ने कहा कि पत्रकारों के उत्पीड़न की प्रत्येक घटना को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों का संकलन, संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन, आवश्यकतानुसार कानूनी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक आंदोलन के माध्यम से संघर्ष किया जाना चाहिए। उन्होंने आवास, चिकित्सा, पेंशन और पत्रकार कल्याण योजनाओं को सरल बनाने के लिए सरकार के समक्ष संगठित रूप से मांग रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के लिए घोषित योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र पत्रकारों तक पहुंचना चाहिए और आवेदन प्रक्रिया अनावश्यक रूप से जटिल नहीं होनी चाहिए।
मुख्य वक्ता एवं प्रदेश संगठन सचिव मराठवाड़ा सैय्यद अनवर कादरी ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा के लिए संघर्ष के साथ-साथ पत्रकारों को अपने अधिकारों और कानून की जानकारी देना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई बार पत्रकार किसी घटना का सामना करने के बाद यह तय नहीं कर पाते कि उन्हें किस कानूनी प्रावधान के तहत शिकायत करनी है। परिणामस्वरूप गंभीर घटना होने के बावजूद उचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत नहीं हो पाता। इसलिए संगठन को समय-समय पर पत्रकार सुरक्षा कानून, पत्रकारों के अधिकार, पुलिस एवं प्रशासनिक प्रक्रिया तथा शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के संबंध में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।
सैय्यद अनवर कादरी ने कहा कि संगठन के प्रत्येक पदाधिकारी को अपने क्षेत्र के पत्रकारों से नियमित संपर्क रखना चाहिए। किसी पत्रकार के साथ समस्या होने पर उसे अकेला छोड़ने के बजाय संगठनात्मक स्तर पर तत्काल जानकारी लेकर उचित मंच पर मामला उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के उत्पीड़न के मामलों में भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय तथ्य, दस्तावेज, समाचार सामग्री, शिकायत की प्रतियां और अन्य आवश्यक प्रमाण सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है। इससे किसी भी मामले को प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर मजबूती से उठाने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने संगठन की एकता पर जोर देते हुए कहा कि पत्रकारों की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की लड़ाई नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई है। संगठन का प्रत्येक सदस्य इस भावना के साथ कार्य करे कि किसी एक पत्रकार पर संकट आने पर पूरा संगठन उसके साथ खड़ा रहेगा।
बैठक में पत्रकारों के हित में निम्न प्रमुख मुद्दों को प्रभावी रूप से उठाने और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करने पर जोर दिया गया—
- पत्रकार सुरक्षा कानून की सभी संबंधित धाराओं के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग।
- पत्रकारों एवं पुलिस-प्रशासन के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।
- पत्रकारों के साथ होने वाली धमकी, मारपीट, उत्पीड़न और पत्रकारिता के कार्य में बाधा डालने की घटनाओं पर तत्काल संगठनात्मक हस्तक्षेप।
- पत्रकारों के लिए सरल एवं पारदर्शी आवास योजना लागू कराने की मांग।
- पत्रकार एवं उनके परिवारों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा एवं स्वास्थ्य योजना।
- वास्तविक सुरक्षा खतरे का सामना कर रहे पात्र पत्रकारों को नियमानुसार शस्त्र लाइसेंस उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग।
- वरिष्ठ एवं जरूरतमंद पत्रकारों के लिए पेंशन योजना का सरलीकरण।
- पत्रकार कल्याण योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र पत्रकारों तक पहुंचाना।
- पत्रकार उत्पीड़न की घटनाओं का दस्तावेजीकरण और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी पैरवी।
- संगठन की जिला, तालुका और स्थानीय इकाइयों को सक्रिय एवं मजबूत करना।
- पत्रकारों में आपसी एकता, अनुशासन और संगठनात्मक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना।
- पत्रकारों को उनके अधिकारों एवं उपलब्ध कानूनी संरक्षण के प्रति जागरूक करना।
- पत्रकार हितों से जुड़े मुद्दों को सरकार एवं प्रशासन के समक्ष संगठित और लोकतांत्रिक तरीके से उठाना।
बैठक के दौरान उपस्थित पत्रकारों ने संकल्प लिया कि पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा, स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन निरंतर संघर्ष करता रहेगा। किसी भी पत्रकार के साथ अन्याय या उत्पीड़न होने पर संगठन तथ्यों के आधार पर लोकतांत्रिक एवं कानूनी तरीके से आवाज उठाएगा। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पत्रकार सुरक्षा कानून को केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा। इसके प्रभावी क्रियान्वयन, पत्रकारों में कानून की जानकारी और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिए संगठन चरणबद्ध तरीके से प्रयास करेगा।
वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। मजबूत संगठन, जागरूक पत्रकार और निरंतर लोकतांत्रिक संघर्ष के माध्यम से ही पत्रकारों की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है।
अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित पत्रकारों ने पत्रकार हितों की रक्षा, संगठन की मजबूती और पत्रकार उत्पीड़न के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
बैठक में मुख्य रूप जिला अध्यक्ष नसीर सय्यद, जिला उपाध्यक्ष फरहान शेख, जिला महासचिव अन्सार सय्यद, जिला सचिव अर्शीद सय्यद, जिला संगठन सचिव गोरख दहिफळे, जिला मिडिया प्रभारी सुरज गवारे, जिला काउंसिल सदस्य जिया सय्यद, किरण कांबले व शहेबाज सय्यद, शेख इरफान आदि पत्रकारगण उपस्थित रहें।







