मुंबई। सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरजीत सिंह ने ऑटो चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता के फैसले पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अब गरीब मेहनतकशों को रोजगार से पहले भाषा की परीक्षा देनी होगी?
उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे महानगर की पहचान ही उसकी विविधता है, जहां देश के कोने-कोने से लोग आकर मेहनत करते हैं। ऐसे में भाषा के नाम पर रोजगार पर शर्त लगाना न सिर्फ अव्यावहारिक है, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा वार है।
सुरजीत सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “सरकार को भाषा सिखाने की चिंता है, लेकिन क्या उन लोगों की चिंता है जो दिन-रात मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालते हैं,
उन्होंने यह भी कहा कि मराठी भाषा का सम्मान सभी करते हैं और करना चाहिए, लेकिन इसे थोपने के बजाय प्रोत्साहन और प्रशिक्षण के जरिए बढ़ावा देना ही सही रास्ता है।
अंत में उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करने और आम जनता के हित में संतुलित निर्णय लेने की मांग की।



